मैं और मेरा दोस्त् मोनी !

मोनी मेरा कुत्ता था !

यह कोई मेरी ही उम् का, लगभग तीन साल ! साथ साथ ही इस दुनिया में आये थे हम दोनों !

आज वोह तो नहीं होगा इस दुनिया में लेकिन उसकी कुछ यादें हमेशा से मेरे साथ हॅ !

मांं शिक्षिका थीं !

मैं गोरखपुर में थी उस समय !

गोरखपुर में रहने वाले तीनों मामा की मै बहुत लाडली थी ! विनोद मामा, सुनील मामा और अखिलेश मामा ! तब उनमें से किसी को भी बेटियांं नहीं थीं यह भी एक वजह थी कि उनके घरों में मेरी उपस्थिति दर्ज होनी ही होती थी !

मैं तब विनोद मामा के यहांं थी !

मोनी वहीं रहता था !

बस फर्क यह था कि मैं मामा के साथ सोती थी और मोनी खटिया के ने सोता था ! मैं विनोद मामा को मोनी के भैया कह कर पुकारती थी क्यों कि वोह मेरे साथ साथ ही मोनी को भी घुमाते टह्लाते थ ! जब भी मैं उनसे पूछती की आप उसे भी मेरे साथ साथ क्यों टहलाते हैं तो मामा कहते थे की मैं इसका बडा भाई हूं न, इसलिये !

एक बार तो यूं हुआ कि मैं खेलते खेलते घर से बाहर निकल आई और न जाने कब एक गाय का बछडा भागता हुआ मेरी तरफ आने लगा  ! जॅसे बस कुचल कर निकल जाने वाल हो कुछ सेकन्ड्स में ! मेरा मोनी तो हमेशा की तरफ मेरे आस पास ही घूम रहा था ! जैसे ही मोनी ने उसे देखा वोह जोर से भूंका और कूद कर मेरे और गाय के बछडा के बीच में आ गया ! वोह उसके बाद भी नहीं रुका तो मोनी मेरे ऊपर आ कर खडा हो गया और लगातार भूंकता रहा ! उसका लगातार भूंकना सुनकर अन्दर तो मेरे नाना तेजी से आये और मुझे उठा कर अन्दर ले गये ! लेकिन मेरे मोनी ने उस गाय को गली से बाहर भगा कर ही दम लिया !

शुक्रिया प्यारे दोस्तोंं !

🙂

 

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मैं और मेरा दोस्त् मोनी !

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