टेकेन ग्रान्टेड्

२०१० से २०१५ के मध्य मैंने अपने दिल के बेहद करीब कुछ रिश्तों को पल भर में ही हमेशा के लिये दूर होते देखा है !

माता-पिता का प्यार, भाई बहनों की नोंक्-झोंक …इन्हें अपने जीवन में अक्सर ही लोग टेकेन ग्रान्टेड ले लेते हैं ! मैंने भी लिया !

मैं अपनी बहन से दिन में दो बार ऑर अपने पिता से महीनों में एक बार बात करती थी ! शायद मेरे पिता मेरे फोन का रोज़् इन्तज़ार करते होंगे यह अहसास मुझे अभी चन्द रोज़ पूर्व ही हुआ – उनके चले जाने के बाद !

हम भाई बहन आपस में ही बात करके फोन रख देते थे !

उसी तरह हम भाई-बहन आपस में लडते रहते थे ! मेरी बहन मुझे बहुत प्यार करती थी और मैं अपने अपने भाई को ! दोनों छोटे भाई बहन जब आपस में लडते थे तो मैं अपनी बहन को हल्के में लेती थी, बल्कि अक्सर उसकी ही गलती बता कर उसे चुप करा देती थी !

हमेशा की तरह उस रोज़ भी मैंन उसे दिन में फोन किया ! अपनी बहन को !
मैंने उसे बोला कि अब मैं तुम्हें मन्डे को काल करूंगी जबकि कहांं तो मैं उसे रोज़ ही दो या तीन बार बातें करती थी !

मैंने उसे कहा (२०१०-अप्रैल्) “आज कहीं जा रही हूं और अब मन्डे बात करूगीं” ! उसने मुझे कुछ नहीं कहा !

फिर पहले ही की तरह दोनों फिर लड गये उस शाम ! फिर आपस में बातें भी बन्द कर दीं !

अचानक ही रात को मेरी बहन को कुछ घबराहट हुई (तीन बज़े के करीब् फिर तीन मिनट के अंतराल में वोह मुझसे दूर चली गई – कभी वापिस न आने को ! हम भाई बहन को आज यह अह्सास हॅ कि हाम दोनों ने उससे बातें नहीं की थीं उसके जाने से पहले !

मैंने व्यस्तता में नहीं की ! भाई ने लडाई करके नहीं की !

मेरे पिता के अन्तिम पलों में भी मैं फोन पर ही थी – टेकेन ग्रान्टेड !
पता नहीं था कि वोह जा रहे हैं !

इधर कुछ दिनों से मेरे पिता मुझे फोन करते थे, स्वत्ः ही, थोडा नियम से ! फिर अचानक एक दिन उनकी तबियत खराब हुई – सुबह से ही (अक्टूबर २०१५)! मैं फोन पर थी लगातार् ! दूसरे सिरे पर मां थी ! फोन पर जब मुझे उनके हाथ पांव ठन्डे होने की बात बताई गई तो मैंने न जाने क्यों उनके मुंह में
गंगा-जल डालने की बात कही ! मां ने तुलसी के पात्तों के साथ जॅसे ही पवित्र गंगा-जल उनके मुख में डाला मेरे पिता के प्राण पखेरू होकर उनके शरीर से निकल गये !

मुझे अहसास हुआ कि मेरे पिता को उनकी अन्तिम यात्रा से पूर्व मेरे फोन का इन्तज़ार था ! उसी रोज़ वोह मेरे सपनों मे भी आये थे – दिन में ही (५ बजे)!

मैं यह कहना चाह्ती हूं आप सभी से कि आप कितने भी व्य्स्त हों, कहीं भी हों, किसी भी हाल में हों, अपने प्रिजनों से हमेशा अविरल सम्पर्क बनाये रखें ! उनके प्यार को, उनकी केयर को टेकेन्-ग्रान्टेड न लें क्योंकि ज़िन्दगी का कोई भरोसा नहीं है !

शुक्रिया दोस्तों

🙂

 

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टेकेन ग्रान्टेड्

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