इस दुनिया और उस दुनिया के पैमाने

कह्ते हैं कि हमारी धरती पर एक पत्ता भी अपनी मर्ज़ी से नहीं हिलता है – लोग खाली हाथ आते हैं और खाली हाथ ले जाते हैं !

हम जब तक इस धरती पर रहते हैं, ईश्वर हमारी आत्मा पर कोई अंकुश नही लगाते हैं ! उस पर भी लोग (मानव – जोकि ईश्वर की सर्वोत्क़ृष्ट रचना है) अपने सही गलत कार्यों को ही अपना लक्ष्य बनाकर चलते चले जा रहे हैं !

सही गलत कर्मों के ईंटों से अपनी बडी बातों बातों के बडे-बडे महल बनाते हुये खुद की खूबसूरत दुनिया बसा लेते हैं !

बैलेंस (समन्वय्) का तराजू हर पल उन्हें साधे रहता है !

पैसा और रूतबा देख कर अपने तेवर बदलना इस दुनिया का अभिन्न अंग बना लिया है ! कुछ लोग दलीलें देते हैं कि “किसने देखा है “उस दुनिया” को”, जो है बस यही है ! जीवन का फन्डा है कि ज़मीर को मारो, खुश रहो और खुश रखो सब को !

परन्तु सच यह नहीं है !

ईश्वर की नज़र में सही और गलत का पैमाना निर्धारित है !

आप यंहा जो भी सही गलत करें, ईश्वर आप को नहीं रोकेंगें ! वोह  ईश्वर ने आप पर छोडा है ! 

या तो एक हाथ हृदय पर रखिये और  उम्र निकल जाने से पूर्व ही अपने आप का स्वत्ः मूल्यांकन कर डालिये ! ज़मीर ज़िन्दा है तो सुधार की स्ंभावना प्रबल पाई जाती है !

या फिर अपने आप को बेस्ट मैनिपुलेटर और समन्वय कर्ता समझते हुये खुद को गौरवान्वित महसूस कीजिये कि “मैंने इतने लोगों को बेवकूफ बना कर खुद को उनसे सर्वोच्य साबित किया” !

किन्तु उन लोगों का क्या जिन्होंने अपनी हानियों को हर प्रकार से सह कर खुद को किनारे कर लिया यह सोच कि “भगवान की मर्ज़ी से हुआ और वोह ही देखेंगे”, वोह यह नहीं जानते कि भगवान ऐसे सारे लोगों की अर्ज़ियां समेट कर बैठे हैं !

शुक्रिया दोस्तों !

🙂

 

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