दूसरी औरत

कहा गया है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है !

इस दुनिया में समाज के कुछ नियम कानून और दायरे हैंं ! समाज में विवाह का बन्धन भी बनाया गया है !  इस लिये ताकि इन्सान दायरे में रहकर अपनी जिम्मेदारियों को बोझ अच्छे से से सम्भाल सके !

पति पत्नी  को दो चक्के के समान भी माना गया है ! जब तक दोनों चक्के नहीं चलेंगे समान रूप से, तब तक परिवार की गाडी सुचारू रूप से नहीं चल पायेगी

और यह बन्धन ऊपर से बन कर आते हैं !

सदियों से लोग इस गाडी को प्रेम और विश्वास के साथ चलाते हुये आगे चलते आये हैं !  और उनका जीवन व्यक्तिगत तौर पर सन्तुष्ट् रहता है – उनके पास दूसरी और चुनौतियां – वोह उनको स्वीकार करते हैं – और लडते चले जाते हैं !

यह एक प्रकार का समाज है, इसमें कुछ नया नहीं है !

पहले राजा महाराजा कई रानियों का लालन पालन करते थे ! वॅसे भी जाब तक राज्य पर कोई विपदा नहीं जाये राजा के पास कुछ और खास काम होता नही था ! आज के कार्पोरेट्स की भांति कार्य बंटा होता था ! मन्त्री, सेनापति और प्रजा सभी अपने अपने कामों में व्यस्त रहते थे !

राजा अपनी रानी और पटरानियों में खुश रहता था !

अब सब कुछ बदल गया है ! आज के दौर में हर मनुष्य एक राजा है और जीवन की आपा-धापी में भी वोह राजाओं से कम जीवन नहीं जीता है !

सामाजिक प्रतिष्ठा के लिये शादी कर लेता है याकि सामाजिक प्राणी होने का समस्त सुख भोग सके ! फिर पुत्र और पुत्रियों की उपज़ हो जाती है ! घर-बार,  धन-धान्य, औलादें इत्यादी से परिपूर्ण मनुष्य अब जीवन क एक रसता से ऊबने लगता है ! मन परिवर्तन की ओर लालायित होने लगता है (वैसे भी परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है) !

अचानक ही उसका मन पत्नी से भर जाता है – (क्योंकि) – पहले से ही अनएकों जिम्मेदारियों का वहन करती पत्नी तो बेचारी बच्चों के प्रति कर्तव्यों का बोझा ढोते-ढोते खुद को ही भूल चुकी होती है – शरीर और सौन्दर्य की तो बात ही क्या करेंं !

अब तक पत की रची हुई भौतिक दुनिया में वोह पूरी तरह से कैद हो चुकी है – मानसिक और शारीरिक !

अब जन्म लेती है दूसरी औरत..

यह कहीं भी उपज जाती है !

कार्य-स्थली पर, बेस्ट के बस स्टाप पर, अंधेरी या बान्ड्रा लोकल (स्टेशन्) पर, इन्-आर्विट माल पर या कहीं भी ! बस मिल जाती है कहीं न कहीं और इस औरत के साथ यह पुरूश अपने अन्दर के बच्चे को खुला छोड देता है !

कंहा तो निढाल, बेरस पत्नी और कंहा ये “दूसरी औरत” जो उसकी सब अतृप्त इच्छायें बेहद आसानी से शेयर कर लेती है ! प्यार भरी बातें; चुहलबाज़ियां; हंसी मज़ाक; साथ साथ खाना; गाडी की उसी सीट पर बैठ कर जाना (जिस पर बैठने के लिये उसकी पत्नी ने सालों सपने देखे और अपनी जरूरतें काट्-काट कर पैसे जुटाये).

कार की सीट ही क्या वोह उसका बिस्तर भी सहज ही उपहार में पा जाती है !

जान्ते हैं आप कि क्यों ?

वोह बेबाक है; अल्हड है; वोह जिम्मेदारियों की बोझिल कर देने वाली बातें नहीं करती; वोह रोज़ एक नये रूप में सज़ती है; नये नये सिरों से सुन्दर दिखती है !

वोह खुल कर खिलखिलाती है; गुदगुदाती है; लुभाती है !

उसकी हर बात में एक अदा है !

उसके पास सब कुछ है आप को दिखाने को, रिझाने को ! सब कुछ ! खुल कर !

तो सज्जन इस कदर डूब जाते हैं कि पत्नी मत्र एक ड्यूटी बन कर रह जाती है ! और फिर जब वोह उस गाडी की सीट पर ले जायी जाती है तो उसे पता भी नहीं होता कि उसे बैलेन्स किया जा रहा है !

” जानू लेकर तो गया था मैं तुम्हें बाज़ीराव मस्तानी दिखाने. तुम बिलकुल मस्तानी ही लग रही थी उस दिन !”

ः))

वोह इन्सान सिर्फ अपने आप को झांसा देता है ताकि आप समाज़ को बता सकें कि आप पूर्ण्तया सामाजिक ही हैं – एलियन नही हॅं !

एक औरत अपने माता-पिता, परिवार, सहेलियां, घर की चौखट, भावनायें…सब कुछ छोडकर किसी के साथ चल देती है !

एक अनजान परिवार को अपना बना कर वोह पूरी जिन्दगी (अपने आप को भूल कर) किसी के बच्चोंं को पालने में लगा देती है !

ऍसे व्यक्ति बच्चो के तो गौरव्शाली पिता बन जाते हैं – ” मेरा बेटा..मेरी बेटा..” अपने बच्चों के बारे में प्राऊडफुल बातें कह कह कर समाज़ में सम्मान पाने की होड में खडे रहते हैं !

अपनी पत्नी का नाम कितने पुरूष अपने बच्चों से ज्यादा लेते हैं ?

पत्नी को खुले-आम क्या वोह उसी आवाज़ में सम्मानित करते हैं जिसकी वोह हकदार है ?

बल्कि वोह तो दूसरी औरत में अपनी खुशी खोज कर अपनी जिन्दगी के तमाम पल उसके साथ गुजारते हैं या गुजारना चाहते हैं जो सिर्फ खुद के लिये जीती है !

एक बात बिलकुल स्पष्ट हॅ – एक औरत्, वोह चाहे पत्नी हो या दूसरी औरत, उसे अपना लक्ष्य हमेशा पता होता है !

पत्नी अपने आप को भूल कर लक्ष्य प्राप्त करती है !
दूसरी औरत अपने लक्ष्य को ध्यान में र्कहते हुये व्यक्ति को खुश रखती है !

फैसला व्यक्ति विशेष का है – कि उसे स्वार्थहीन प्यार और समर्पण को सम्मान देते हुये प्यार देना है या स्वार्थी का साथ देना है !

शुक्रिया दोस्तों !

🙂

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