जीवन में मेन्टॉर और सच्चे मार्ग्-दर्शक का सहयोग

जीवन एक यात्रा के समान है !
हर व्यक्ति अपने जीवन की यात्रा जन्म से मृत्यु के मध्य पूर्ण करता है ! इस यात्रा के बीच जीवन में में कई बार बहुत से उतार चढाव आते हैं ! अपने गन्तव्य तक पहुंचने के लिये तुम, हम न जाने कितने कष्ट सहते हैं और कितनी ही कीमते देते हैं !

कई बार तो सफर इतना कष्ट्-प्रद हो जाता है कि हम अपना हौसला छोड देते हैं ! कई बार स्वय्ं पर विश्वास टूट जाता है और हम स्वत्ः ही खुद में कमियां देखने लगते हैं – अपने कर्मों का दोषा-रोपड करने लग पडते हैं !  धीरे धीरे सब कुछ् हाथों से छूटत चला जाता है मुट्ठी मे फिसलती रेत के समान !

ऐसे में कभी कभी कोई मेन्टोर बन कर जीवन में आ जाता है जिसके दसेक शब्द या कुछ वाक्य हममें ऊर्ज़ा प्र्वाहित कर देते हैं कि जिस कार्य को लक्ष्य बना कर चलते-चलते आप निढाल हो चूर-चूर होने को थे, उसी लक्ष्य की तरफ अनवरत बढ्ने के लिये बल मिलता है !

ऐसे में आप अपने उस लक्ष्य को प्राप्त करने के सही अवसर का ईंतजार पूरे मन से करते हैं (जिस लक्ष्य को इससे पूर्व अपमे कष्टों से घबरा कर और लोगों के कहने की वजह से एक गलत मार्ग समझने लगते हैं) !

इसीलिये अपने जीवन में आने वाले एक सच्चे मार्ग्-दर्शक का स्वागत खुले दिल से करिये !

मैं गुज़रे छ्ह वर्षों से चले आ रहे कष्टों के कारण कहीं न कहीम मानसिक और शारीरिक तौर से टूटुकी थी ! लोगों ने भी कोई कसर कहां छोडी थी हमें नेस्तनाबूत करने में !

ऐसे में एक व्यक्ति हमारे जीवन में आये – २०१४ के बीतते ! उन्होंने गणना कर के मुझे और मेरे जीवन साथी को बताया कि अभी कष्टों के दिन चल रहे हैं ! यह ऐसे ही चलते रहेगें २०१५ में भी ! परन्तु उसके बाद वोह सब कुछ घटित होगा जो हम चाहते हैं !

वोह ऐसे नाज़ुक समय में आये थे जब चारों ओर घना अंधियारा छा चुका था और हमें हाथ को हाथ् नहीं सूझता था !

फिर हम हम कष्टों के साथ साथ चलते रहे और आने वाले वक्त का ईतज़ार करने लगे, अपने लक्ष्य की उन्ग्लियां थामे ! चलते रहे !

अब कष्ट को देखने का नज़रिया बदल गया था ! डिप्रेशन्स अभी भी आते थे ! लेकिन सर की बातें और सकारात्मक विचार हमें उबार लेने को हमेशा तत्पर होते थे !

२०१५ भी चला गया !

आज घना अंधेरा छ्ंटने लगा है ! प्रात् की लालिमा दीखने लग पडी है !

इसलिये दोस्तों लक्ष्य के साथ जीवन में आगे बढने से मत डरो ! कष्टों के बाद आने वाले अच्छे समय का ईंतज़ार करो ! इन कष्टों से बहुत सा ग्यान मिलता है जिसका एहसास इस कष्टों से उबरने के उपरांत ही मिलता है !

तदुपरांत दुख और सुख में फर्क नहीं पाते हैं ! दोनो समान प्र्तीत होते हैं ! अंधेरे के बाद सुबह का उज़ाला अवश्त होता है ! यह ही प्र्कृति का नियम है ! अत् हमें उस उज़ालेव का स्वागत करना है !

थैंक्यू हीरव सर !

कहीं से आप को ईश्वर ने हमारे पास भेजा था ! और आप हमें मिले !

दोस्तों आप के लिये भी ईश्वर ने बहीं न कहीं एक हीरव सर तय किये होंगे ! जो आप को अवश्य खोज़ लेंगे जब भी आप के जीवन में तिमिर गहराने लगेगा ! वो आपको उबार लेंगे ! और एक नये स्ंचार कर देंगे !

शुक्रिया दोस्तों !

:))

Advertisements
जीवन में मेन्टॉर और सच्चे मार्ग्-दर्शक का सहयोग

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s