सही या गलत

जिन्दगी में हमेशा लोग सही और झूठ का अन्तर समझने में या तो अपनी उम्र गंवा देता है या समय और धन !

झूठा व्यक्तित्व हमेशा हर तरफ से मुक्त झूठ के खूबसूरत महल बनाता है – लोगों को उसमें ला कर फंंसाता है और कमाता है ! लेकिन सच्चा इन्सान सारा गुण और तजुर्बा र कर सही वक्त और मौके का इन्तजार करता है ! कभी किसी को मंजिल मिलती है और कोई मंजिल की आस में उम्र बिता चला जाता है !

सच और झूठ का बस इतना अन्तर है कि झूठ सभी कुछ पाता है और मंजिल तक पहुंचने के उपरांत उसी तरह गंवा देता है जैसे पाया होता है !

इस सफर में सच कई वेदनाओं से गुजरता है ! कभी आस तोड्ता है तो कभी जोडता है लेकिन अंत में सच और झूठ का फैसला एक दिन ऊपरवाला ज़रूर करता है ! तब तक संयम रखना होता ! इस संयम को रकह्ने का धैर्य भी हमें वही देता है !

यह खेल आत्माओं और विचारों का होता है !

आपकी आत्मा आपको सच का साथ देने के लिये प्रेरित करती है या झूठ का साथ देने के लिये, आपकी कितनी बातें आत्माओं को ठेस पहुंचाती है और / या कितनी आत्माओं को संतुष्ट करती हैं यह आप के व्यक्तित्व पर निर्भर करता है !

सच – झूठ का फैसला भी वयक्तिगत रूप से आत्माओं पर ही निर्भर करता है !

दोस्तों, मुझे लगता है कि सच की राह पर चला जा सकता है !

इस पर कष्ट बहुत है – अपमान भी सहना पडता है ! यह अपमान आपको प्रेरित करता है कि आप उस झूठे व्यक्ति को ज़वाब देकर खुद कअ आत्म-सम्मान बचाते हुये खुद को स्ंतुष्ट कर सकते हैं ! पर मैं अपने सभी सही गलत फैसलों का न्याय करने का अधिकार ईश्वर को देती हूं ! एक दिन वह न्याय जरूर करेगा !

शुक्रिया दोस्तों !
एक बेहद शुभ रविवार की अभिलाषा के साथ – आपकी रीत्ति श्रीवास्तवा !

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सही या गलत

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